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Bengalureans to bathe in forests to destress

namaste, Read, Review and Share DElotus -Flowering of Innate Human Potential Forest bathing, workshop,  in Bangalore with The Wonderful Benefits Of The Holistic Health Approach  to Preventive Wellness The New Indian Express http://www.newindianexpress.com/cities/bengaluru/2017/may/25/bengalureans-to-bathe-in-forests-to-destress-1608697.html

Yoga with dogs comes to Bengaluru

Yoga with dogs comes to Bengaluru

Akhila DamodaranA three-hour workshop that will help you bond better with your pooch through yoga comes to town next month.

Neeraj, who with his Delotus team is travelling across South India conducting workshops, calls Doga ‘the sacred union between pets and pet parents’.

“Including your dog in your yoga practice enables you to observe your attitude towards yourself and all living beings, and gain a deeper insight of your behaviour patterns that arise from the mind,” says the contemporary speaker, teacher and writer on philosophical and spiritual subjects.The workshop includes yogic techniques, mantras and some asanas.

“People equate yoga with asana. But asana is a small part of yoga. Yoga stands for union,” he elaborates.

A lot of the postures are derived from the animal kingdom, he explains. They are modified on the basis of how the dogs and their parents respond to it.

The event’s date and venue have not  yet been finalised. Registrations are likely to open a day or two before the event.

Parents can come with their ‘small, submissive and docile dogs’. But the canines shouldn’t be scared, either, he maintains. The dogs will be assessed before the event.

“This might be a first-time experience for them,” Neeraj admits. “In the past, we have done this with aggressive as well as shy dogs.”

But such experiments need space, something the organisers are not sure of getting this time.

If the dogs are excited, there are ways to relax them — through treats — he says. Then, they will move around and play, and perhaps join in the exercise, imitating the other canines around.

Neeraj rubbishes the notion that Doga is just about canines performing acts.

“It is all about creating a bond with your partner pet,” he reiterates. “They may or may not perform stretches themselves, but they will push you to do it. And pet parents will feel relaxed when their pets are around.”

Moreover, dogs are known to have a therapeutic effect, he continues. “It is proven that they are good stress busters,” he says.

Doga is gaining popularity, he thinks. He has been interacting with the people on his  Facebook page about its benefits.

He says, “Nature is an integral part of yoga which leads to relaxation, and dogs are a part of nature. I feel animals are superior to humans.”

http://www.newindianexpress.com/cities/bengaluru/Yoga-with-dogs-comes-to-Bengaluru/2016/07/21/article3539061.ece

योगा के बाद 'डोगा' और फ़ेस योग - BBC हिंदी

योग करने का यूं तो एक पारंपरिक तरीका है लेकिन बदलते वक़्त के साथ इस तरीके में बदलाव आए हैं.

अब योग सिर्फ़ एक कोने में, अकेले बैठ कर नहीं बल्कि आप अपने जीवनसाथी, डांस पार्टनर यहां तक कि अपने पालतू जानवर के साथ भी कर सकते हैं.

बीबीसी ने नज़र डाली योग करने के ऐसे ही कुछ नए और अनूठे तरीकों पर.

 

डोगा

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वैसे तो डोगा एक लोकप्रिय हिंदी कॉमिक किरदार का नाम है लेकिन इसी नाम से एक योग शैली भी विकसित की गई है.

'डोगा' यानि डॉग के साथ योग, जिसमें आप अपने पालतू कुत्ते के साथ योग कर सकते हैं.

आमतौर पर लोग पालतू कुत्तों के साथ जॉगिंग या रनिंग करते हैं जिसमें जानवर को भी काफ़ी थकान होती है लेकिन डोगा इसका उलट है.

Image copyright acharya neeraj

योग गुरु नेहा बताती हैं, "डोगा का यह मतलब नहीं कि कुत्ते योग करते हैं बल्कि हम जो आसन करते हैं वो कुत्ते के साथ करते हैं और ये क्रिया इसलिए की जाती हैं कि इंसान और जानवरों के बीच का रिश्ता मजबूत हो."

नेहा के मुताबिक अगर आप कुत्ते के साथ ग्राउंड या उनके लेवल पर उनके साथ बैठते हैं तो वो आपमें ज़्यादा रूचि लेते हैं और मालिक के इस व्यवहार पर वो गर्व महसूस करते हैं और जब आप उसके सामने योग करते हो तो वो भी आपकी नक़ल करता है.

फ़ेस योग

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योगा एक्सपर्ट आचार्य नीरज कहते हैं कि बढ़ती उम्र का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखता है और ऐसे में 'फ़ेस योग' आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होता है.

फ़ेस योग के बारे में कुछ खास बातें बताते हुए आचार्य नीरज कहते हैं, "किसी का चेहरा बेहद मोटा है या किसी की आँखों की रोशनी कम है या किसी को नाक-कान से जुड़ी समस्या है तो फ़ेस योगा किया जा सकता है."

आचार्य नीरज कहते हैं कि साधारण तरीके से आसन करते वक्त हम कंधों से नीचे वाले शरीर पर ज़्यादा मेहनत करते हैं लेकिन चेहरे के लिए कुछ नहीं करते लेकिन फ़ेस योग के ज़रिए हम अपने चेहरे की काया बदलने की कोशिश करते हैं.

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मसलन काली मुद्रा के लिए अपनी जीभ को सुविधानुसार बाहर निकाल दें और उसी मुद्रा में 30 सेकंड तक रहें.

आंखों की एक्सरसाइज के लिए चेहरा सामान्य रखते हुए आंखों की पुतलियों को दाएं और फिर बाएं घुमाने के बाद 30-30 सेकंड तक पुतलियों को स्थिर रखें. फिर ऊपर-नीचे और फिर गोल-गोल घुमाएं. इसे डांसिंग आई बॉल योग कह सकते हैं.

आचार्य नीरज के मुताबिक गालों को अंदर भींचकर चेहरे को मछलीनुमा बनाने से भी गालों पर जमी वसा कम होती है और आप इसे फिश फ़ेस योगा कह सकते हैं.

लाफ़्टर योगा

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योग गुरु इस शैली को तनाव, डिप्रेशन और परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए कारगर मानते हैं.

लाफ़्टर योगा यानि हंसकर किया जाने वाला योगा जिसमें आपको कृत्रिम नहीं बल्कि स्वाभाविक तौर पर हंसाया जाता है.

आचार्य नीरज के अनुसार इस योग से मस्तिष्क की कोशिकाओं में एंडोरफ़िन नामक रसायन उत्पन्न होता है जो हमारा मूड बदल देता है.

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